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राष्ट्रीय संस्थान
भारत सरकार के  सा० न्याय० व अधि० मंत्रालयए दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के अन्तर्गत दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत नौ राष्ट्रीय संस्थान हैं। राष्ट्रीय संस्थान विभिन्न प्रकार की दिव्यांगताओं के लिए स्थापित स्वायत निकाय है । ये संस्थान दिव्यांगता के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, दिव्यांगजनों को पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने तथा अनुसंधान एवं विकास के प्रयासों में कार्य कर रहें हैं जो निम्न हैः- 
  1. राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी), देहरादून
  2. अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगता संस्थान (एवाईजेएनआईएसएचडी), मुंबई 
  3. राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी), सिकंदराबाद 
  4. राष्ट्रीय बहु दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीएमडी), चेन्नई
  5. पं. दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शारीरिक दिव्यांगजन संस्थान (पीडीयूएनआईपीपीडी), दिल्ली 
  6. स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (एसवीएनआईआरटीएआर), कटक  
  7. राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान (एनआईएलडी), कोलकाता
  8. भारतीय संकेत भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्र (आईएसएलआरटीसी), नई दिल्ली
  9. राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (एनआईएमएचआर), सीहोर
राष्ट्रीय संस्थान के उद्देश्य :
राष्ट्रीय संस्थान दिव्यांगता के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास, दिव्यांगजनों को पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराने तथा अनुसंधान एवं विकास संबंधी प्रयास करने का कार्य रहे हैं। राष्ट्रीय संस्थान व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण, नियोजन तथा दिव्यांगजनों को सहायक यंत्र एवं उपकरण के वितरण की व्यवस्था भी कराते हैं।
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन  सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी), देहरादून 
राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन  सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीवीडी), देहरादून की स्थापना वर्ष 1979 में हुई थी। संस्थान के मुख्य उद्देश्य विशेष उपकरणों/यन्त्रों के प्रभावी मूल्याकंन अथवा उपयुक्त सर्जिकल एवं मेडिकल प्रक्रियाओं अथवा नवीन विशेष उपकरणों / यंत्रों के विकास के प्रभावी मूल्यांकन के लिए बायो मेडिकल इंजीनियरिंग में अनुसंधान कराने, प्रायोजित करने, समन्वित करने अथवा सब्सिडी प्रदान करने के लिए प्रशिक्षकों एवं पुनर्वास व्यावसायिकों का प्रशिक्षण कराना या प्रायोजित करना है।
अली यावर जंग राष्ट्रीय वाक् एवं श्रवण दिव्यांगता संस्थान (एवाईजेएनआईएसएचडी), मुंबई 
वाक् एवं श्रवण दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के जनशक्ति विकास, अनुसंधान, क्लीनिकल सेवाएं, आउटरीच एवं विस्तार (एक्सटेंशन) सेवाएं, सामाजिक-आर्थिक पुनर्वास सेवाएं, सामग्री विकास और सूचना संग्रहण, प्रलेखन और वाक् एवं श्रवण दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए सूचना के प्रसार करने के उद्देश्यों के साथ 1983 में संस्थान की स्थापना की गई है ।
राष्ट्रीय बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीआईडी), सिकंदराबाद 
जीवन चक्र आवश्यकताओं के आधार पर पुनर्वास के गुणवत्तापरक मॉडल के माध्यम से सेवाएं प्रदान करने तथा मानव संसाधन सुसज्जित करने के उद्देश्य से वर्ष 1984 में संस्थान की स्थापना की गई। देश में बौद्धिक दिव्यांगजन के क्षेत्र में प्रशिक्षण, अनुसंधान और सेवायें इसके त्रिपक्षीय कार्य हैं।
राष्ट्रीय बहु दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीएमडी), चेन्नई 
राष्ट्रीय बहु दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (एनआईईपीएमडी), चेन्नई की स्थापना वर्ष 2005 में बहु दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय संसाधन केन्द्र के रूप में कार्य करने के उद्देश्य के साथ की गई थी। निःशक्तजन (1995) अधिनियम और राष्ट्रीय न्यास (1999) में यथा उल्लिखित एक से अधिक दिव्यांगताओं से ग्रस्त व्यक्तियों को आवश्यकता आधारित पुनर्वास सेवाएं उपलब्ध कराई जाती है। देश में उपलब्ध सेवाओं की कमी को ध्यान में रखते हुए इस संस्थान की स्थापना टीम एप्रोच के माध्यम से बहु दिव्यांगता वाले व्यक्तियों तथा उनके परिवारों के समावेशन और  सशक्तिकरण में सहायता और इसे सुनिश्चित करने के लिए व्यापक पुनर्वास उपलब्ध कराने के मिशन के साथ की गई। बहु दिव्यांगता वाले अधिकांश व्यक्तियों तक पहुँचने के लिए केन्द्र तथा समुदाय दोनों में पुनर्वास सेवाएं प्रदान की गई । प्रमस्तिष्क घात, स्वलीनता, बधिर-अन्धता तथा बाल्यकाल पूर्व विशेष शिक्षा वाले बच्चों के लिए यूनिटों के साथ “थिरामी माॅडल स्पेशल स्कूल” की स्थापना की गई है । यह माॅडल स्कूल प्रशिक्षुओं के लिए व्यावहारिक एक्सपोजर की प्रयोगशाला के रूप में कार्य रहा है। 
पं. दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय शारीरिक दिव्यांगजन संस्थान (पीडीयूएनआईपीपीडी), दिल्ली 
इस संसथान की स्थापना वर्ष 1960 में की गई। संस्थान के मुख्य उद्देश्य आर्थोपेडिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास के लिए प्रशिक्षित जनशक्ति विकसित करना, आउटरीच सेवाएं प्रदान करना तथा अनुसंधान करना है। संस्थान दीर्घावधि के स्नातक स्तर के तीन पाठ्यक्रम - बैचलर ऑफ़ फिजियोथैरेपी (बीपीटी), बैचलर ऑफ़  आक्यूपेशनल थैरेपी (बीओटी) तथा बैचलर ऑफ़  प्रोस्थेटिकस एवं आर्थोटिक्स (बीपीओ), चला रहा है।
स्वामी विवेकानंद राष्ट्रीय पुनर्वास प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (एसवीएनआईआरटीएआर), कटक 
यह संस्थान कटक (ओडिशा) में 1975 में स्थापित किया गया था। संस्थान का उद्देश्य मानव संसाधन विकास, सेवा वितरण कार्यक्रमों का कार्यान्वयन, अनुसंधान और आउटरीच कार्यक्रम हैं। यह शारीरिक दिव्यांगजनों के पुनर्वास के लिए डॉक्टरों, इंजीनियरों, प्रोस्थेटिस्ट्, ऑर्थोटिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट, व्यावसायिक थेरेपिस्ट, बहु उद्देश्यीय पुनर्वास थेरेपिस्ट जैसे व्यक्तियों और इस प्रकार के अन्य कार्मिकों का प्रशिक्षण शुरू कराताध् प्रायोजित करता है और इसको समन्वित करता है।
राष्ट्रीय गतिशील दिव्यांगजन संस्थान (एनआईएलडी), कोलकाता
इस संस्थान की स्थापना अस्थिविषयक (ओर्थोपेडिक्स) दिव्यांगता से ग्रस्त आबादी को सेवाएँ प्रदान करने के लिए जनशक्ति तैयार करने हेतु मानव संसाधन का विकास करने के उद्देश्य से 1978 में की गई थी। संस्थान फिजियोथेरेपी, ओक्यूपेशनल थेरेपी, प्रोस्थेटिक्स और आर्थोटिक्स में स्नातक पाठ्यक्रम चलाता है। यह दिव्यांगता पुनर्वास और प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रम चलाता है। अन्य डिप्लोमा पाठ्यक्रम और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रमों के अतिरिक्त बहु उद्देश्यीय पुनर्वास, प्रोस्थेटिक्स और आर्थोटिक्स के क्षेत्र में सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं।
भारतीय सांकेतिक  भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्र (आईएसएलआरटीसी), नई दिल्ली
भारतीय सांकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केन्द्र (आईएसएलआरटीसी) दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक और वित्तीय नियन्त्रण के अन्तर्गत एक स्वायत्त संगठन है। सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के प्रावधानों के अनुसार, 26 सितम्बर, 2015 में नई दिल्ली में की गई है। केन्द्र का उद्देश्य निम्नानुसार हैं: 
1. भारतीय संकेत भाषा (आईएसएल) के प्रयोग और शिक्षण के उपयोग के लिए   जनशक्ति तैयार करना और आईएसएल में द्विभाषिता सहित अनुसंधान संचालित करना।
2. बधिर छात्रों के लिए प्राथमिक, माध्यमिक और उच्चतर शैक्षिक स्तर पर शैक्षिक प्रणाली के रूप में भारतीय संकेत  भाषा के प्रयोग को बढ़ाना।
3. भारत में और विदेश में विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्था के सहयोग के माध्यम से अनुसंधान शुरू करना और भारतीय संकेत भाषा का भाषायी रिकार्ड/विश्लेषण सृजित करना जिसमें भारतीय संकेत भाषा कोर्पस शब्द कोष शामिल है।
4. विभिन्न समूहों अर्थात सरकारी कर्मचारियों, शिक्षकों, व्यावसायिकों, समुदाय लीडर और जनता को व्यापक रूप से भारतीय संकेत भाषा के समझ में और प्रयोग करने की ओर उन्मुख एवं प्रशिक्षित करना।
5. भारतीय संकेत भाषा को बढ़ावा देने और इसका प्रचार करने हेतु दिव्यांगता के क्षेत्र में बधिर और अन्य संस्थानों के साथ सहयोग करना।
6. विश्व के अन्य भागों में प्रयुक्त संकेत भाषा से संबंधित जानकारी इकट्ठी करना ताकि इस इनपुट (सूचना) प्रयोग संकेत भाषा के उन्नयन करने (अपग्रेड) के उपयोग में लाया जा सके।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास संस्थान (एनआईएमएचआर), सीहोर
विभाग के तत्वाधान में सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत सोसाइटी  के रूप में सिहौर, मध्यप्रदेश में, प्रथम तीन वर्षों में 179.54 करोड़ रूपये (गैर-आवर्ती 128.54 करोड़ रूपए और आवर्ती व्यय 51 करोड़ रूपए) की अनुमानित संचयी लागत से राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और पुनर्वास संस्थान (एनआईएमएचआर) की स्थापना के प्रस्ताव को केंद्रीय  मंत्री मंडल  अनुमोदित किया है। 
    प्रस्तावित संस्थान के उद्देश्य निम्नानुसार हैंः-
  • एक एकीकृत बहु-विषयक दृष्टिकोण (एप्रोच) का प्रयोग करते हुए मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास को बढ़ावा देना।
  • कौशल निर्माण को बढ़ावा देना और शुरू करना और मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास के क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यावसायिकों को तैयार करने में शामिल होना।
  • मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में अनुसंधान और विकास और नीति निर्धारण में कार्य करना।
संस्थान अपने सुप्रशिक्षित मैडिकल, पैरा-मैडिकल और अन्य व्यावसायिकों के कार्यदल के माध्यम से बाह्य रोगियों को सेवा प्रदान करेगा। इसमें मानसिक रूग्णता से ग्रस्त रोगियों और उनके परिवारों को उपचार के समय के दौरान संस्थान में अस्थायी रूप से ठहराए जाने की व्यवस्था के लिए 20 स्टूडियो अपार्टमेंट का भी प्रावधान है। 
संस्थान  मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास में डिप्लोमा, डिग्री, स्नाकोत्तर और अवर स्नातक स्तर के विभिन्न पाठ्यक्रमों को भी चलाएगा।
दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास, पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी)
दिव्यांगजनों के कौशल विकास, पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय संस्थानों की देखरेख में और मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन 19 समेकित क्षेत्रीय केंद्र (सीआरसी) कार्य कर रहे हैं। ये सीआरसी देश के कुछ क्षेत्रों में, जिनके पास संस्थागत सहयोग की कमी है, दिव्यांगता के सभी क्षेत्र को शामिल करते हुए स्थापित किए गए है।
सीआरसी के उद्देश्य
सीआरसी राष्ट्रीय संस्थानों की विस्तारित शाखाओं के रूप में कार्य कर रहे हैं और एक ही स्थान पर बहु एवं भिन्न-भिन्न दिव्यंगताओं की आवश्यकता को पूरा करने के लिए मानव संसाधन विकास, और पुनर्वास सेवाएं प्रदान करते हैं। सीआरसी ने व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण, नियोजन, अनुसंधान करने और विकास के प्रयासों तथा दिव्यांगजनों के लिए सहायक यंत्र एवं उपकरणों के वितरण की व्यवस्था भी की है।
वर्तमान में देश के विभिन्न हिस्सों में कार्य कर रहे सीआरसी निम्नानुसार हैं: -  

क.

संख्या

सीआरसी का नाम

राष्ट्रीय संसथान का नाम जिसके तहत सीआरसी कार्य कर रहा है 

1.

सीआरसी, गुवाहाटी (असम)

एस वी एन आई आर टी ए आर, कटक

2.

सीआरसी, सुंदरनगर (हिमाचल प्रदेश)

एन आई ई पी वी डी, देहरादून

3.

सीआरसी, भोपाल (मध्य प्रदेश)

अ वा जे एन आई एस एच डी, मुंबई 

4.

सीआरसी, श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर)

पी डी यू एन आई पी पी डी, नई दिल्ली

5.

सीआरसी, लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

पी डी यू एन आई पी पी डी, नई दिल्ली

6.

सीआरसी, पटना (बिहार)

एन आई एल डी, कोलकाता

7.

सीआरसी, अहमदाबाद (गुजरात)

अ वा जे एन आई एस एच डी, मुंबई 

8.

सीआरसी, कोझीकोड (केरल)

एन आई ई पी एम डी, चेन्नई

9.

सीआरसी, राजनंदगांव (छत्तीसगढ़)

एस वी एन आई आर टी ए आर, कटक

10.

सीआरसी, नेल्लोर (आंध्र प्रदेश)

एन आई ई पी आई डी, सिकंदराबाद

11.

सीआरसी, देवांगीर (कर्नाटक)

एन आई ई पी आई डी, सिकंदराबाद

12.

सीआरसी, नागपुर (महाराष्ट्र)

एन आई ई पी एम डी, चेन्नई

13.

सीआरसी, अगरतला (त्रिपुरा)

एन आई एल डी, कोलकाता

14.

सीआरसी, नहारलागून (अरुणाचल प्रदेश)

एन आई एल डी, कोलकाता

15.

सीआरसी, रांची (झारखण्ड)

एस वी एन आई आर टी ए आर, कटक

16.

सीआरसी, बलांगीर (ओडिशा)

एस वी एन आई आर टी ए आर, कटक

17.

सीआरसी, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)

एन आई ई पी एम डी, चेन्नई

18.

सीआरसी, सिक्किम

एन आई ई पी एम डी, चेन्नई

19.

सीआरसी, अंडमान व निकोबार

एन आई ई पी एम डी, चेन्नई

 

अंतिम नवीनीकृत : 2019-09-26 02:39:45