दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग

सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय,
भारत सरकार

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(क) सरकार द्वारा विकलांग व्यक्तियों के उद्यमिता और कौशल विकास हेतु लागू की जा रही योजनाओं का ब्यौराः

  • एनएचएफडीसीः वर्ष 1997 में, सरकार ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में, विकलांग व्यक्तियों को स्वरोजगार हेतु रियायती ब्याज दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए एक निगम-राष्ट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम की स्थापना की थी। निगम द्वारा विकलांग व्यक्तियों को कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता हेतु कौशल प्रशिक्षण अनुदान भी प्रदान किया जाता है जिसमें निगम प्रशिक्षण संस्थानों/संगठनों को प्रशिक्षण कार्यक्रमों की कुल आवर्ती लागत का 100 प्रतिशत प्रदान करता है। एनएचएफडीसी प्रशिक्षण के दौरान विकलांग प्रशिक्षणार्थियों को प्रतिमाह 2000/-रूपए का वजीफा भी प्रदान करता है। प्रशिक्षण की अवधि 1 माह से 6 माह की होती है। एनएचएफडीसी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों हेतु निधियां डीडीआरएस और सिपडा योजनाओं के माध्यम से और साथ ही निगम के आंतरिक संसाधनों से प्रदान की जाती है।
  • दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना-दीनदयाल विकलांग पुनर्वास योजना के अंतर्गत, विकलांग व्यक्तियों के कौशल उन्नयन हेतु व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्र परियोजनाओं को वित्तीय सहायता (परियोजना लागत के 90 प्रतिशत तक) प्रदान की जाती है। यह कौशल 15 से 35 वर्ष की आयु समूह के लिए है ताकि ऐसे व्यक्ति आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे आ सके।
  • राष्ट्रीय संस्थानों के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण-विकलांग जन सशक्तिकरण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अंतर्गत 07 राष्ट्रीय संस्थान भी विकलांग व्यक्तियों के लिए उनकी संबंधित विकलांगता के क्षेत्र में समुचित ट्रेड्स के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
  • विकलांग व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण एवं पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 के कार्यान्वयन की योजना (सिपडा) इस योजना के अंतर्गत, विकलांग व्यक्ति अधिनियम, 1995 से संबंधित विभिन्न गतिविधियों हेतु केन्द्र अथवा राज्य सरकारों के अधीन राज्य सरकार तथा स्वायत्त संगठनों/संस्थाओं को सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत, वर्ष 2013-14 से विकलांग व्यक्तियों के कौशल विकास कार्यक्रमों हेतु अनुदान सहायता प्रदान की जाती है।
  • विकलांगों हेतु व्यावसायिक पुनर्वास केन्द्र-श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा देश के विभिन्न भागों में 21 व्यावसायिक पुनर्वास केन्द्रों की स्थापना की गई है। इन केन्द्रों का मुख्य उद्देश्य,विकलांग व्यक्तियों को समाज में एक स्वतंत्र और उपयोगी जीवन जीने में सहायता प्रदान करने की दृष्टि से उनकी शेष क्षमताओं के अनुसार अनौपचारिक व्यावसायिक प्रशिक्षण और व्यावसायिक पुनर्वास सहायता प्रदान करना है।

(ख) विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत प्रदान की गई और उपयोग की गई निधियों  का विवरण अनुबंध (क) तथा अनुबंध (ख) पर है।

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अंतिम नवीनीकृत : 22-01-2015